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महिला आरक्षण को लेकर हरियाणा की राजनीति पूरी तरह से गर्म

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच महिला आरक्षण को लेकर वाकयुद्ध

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सत्य खबर हरियाणा

Haryana politics : महिला आरक्षण बिल को लेकर हरियाणा के राजनीति इस समय पूरी तरह से गर्म है। एक ओर जहां सत्ता पक्ष महिला आरक्षण को रोकने का ठीकरा कांग्रेस के सिर फोड़ रहा है वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में ही नहीं है।

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असल में 17 अप्रैल को 131 वां संविधान संशोधन लोकसभा में पास नहीं हो सका था। परिसीमन को लेकर लाया गया यह बिल विपक्ष के विरोध के कारण गिर गया था। इस बिल के माध्यम से देश की संसद में सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जानी थी। कांग्रेस को अन्य विपक्षी दलों का आरोप था कि भाजपा मनमाने तरीके से परिसीमन करना चाहती है। इससे कुछ राज्यों को नुकसान होने की संभावना भी व्यक्त की गई थी।

दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण को रोकने का काम किया है। भाजपा का मानना है कि इस बिल के माध्यम से 2029 में महिलाओं को आरक्षण मिल जाता। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि अगर भाजपा वास्तव में महिला आरक्षण लागू करना चाहती थी तो बिल 2023 में पास हो चुका था और 2024 में चुनाव में भाजपा वर्तमान सीटों में से एक तिहाई सीट महिलाओं के लिए आरक्षित कर सकती थी।

वर्तमान में स्थिति है कि इस बिल को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही आमने-सामने और मौका कोई भी हो वह इसे भुनाने का प्रयास करते हुए नजर आते हैं। बिल गिरने के बाद से अब तक पिछले 6 दिनों में दोनों ही दलों ने लगातार एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलने का काम किया है। इस मामले को लेकर दोनों ही दल अपनी-अपनी दलीलें जनता के बीच रखने का काम कर रहे हैं। ‌ यह तो समय बताएगा की जनता किसकी दलील को ठीक मांगती है और इस मामले में किस गलत मानती है लेकिन फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही अपने-अपने तर्क निर्धारित कर रखे हैं जहां भाजपा कांग्रेस को महिला विरोधी करार देने में लगी है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने आज तक अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला को नहीं बनाया है। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि भाजपा किसी भी राज्य में किसी महिला को मुख्यमंत्री बनने के पक्ष में भी नहीं है।

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कांग्रेस का आरोप है कि 2023 में नारी शक्ति वंदन विधेयक पास होने के बावजूद भाजपा ने इसे 2026 अप्रैल तक लागू भी नहीं किया था। इस मामले में संविधान संशोधन विधेयक से ठीक पहले भाजपा ने इसे आधी रात को लागू किया क्योंकि जब तक विधेयक लागू ही नहीं है तब तक संशोधन बिल नहीं लाया जा सकता।

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